केंद्रीय मंत्रियों में आरक्षण मुद्दा पर विवाद,बवाल।
बेतिया, बिहार।
केंद्र केभाजपा शासित मोदी सरकार के बिहार के दो केंद्रीय मंत्रियों में, आरक्षण मुद्दा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, दोनों एक दूसरे पर इस मुद्दे को लेकरअनर्गलबयान दे रहे हैं,दोनों एक दूसरे से केंद्र सरकार के मंत्री पद से त्यागपत्र देने की मांग कर रहे हैं। आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जो चुनाव के समय में मतदान की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं,चुनाव में खड़े हुए सभीअभ्यर्थी इसका नाजायज फायदा उठाते हैं,साथ ही चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने के लिए विरोधी पार्टियों का धज्जी उड़ाते हैं।जंतर मंतर पर छात्र काआंदोलन के मुद्दे को छोड़कर,आरक्षण का मुद्दा पर दो केंद्रीय नेताओं कोअपनेअभियान पर तत्काल लगाम लगाना चाहिये,मगर बयानबाजी जारी है। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने छात्रआंदोलन छात्रों पर किए गए अत्याचार,जेल में डालने गोली चलाने,जो पूरे भारत कई राज्यों में छात्र आंदोलन चला,जिसे छात्रों को बहुत बड़ी क्षति हुई है,
उनका जानमाल,शैक्षणिक करियर,चिकित्सा और स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव पड़ा है,इसआंदोलन से हुई नुकसान पर पर्दा डालने के लिए इन दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने लोगों का ध्यान इस बिंदु पर से हटाने के लिए आरक्षण का मुद्दा छेड़ दिया है,ताकि देश और राज्य की जनता छात्र आंदोलन से हुई क्षति पर ध्यान नहीं दे सके।आरक्षण मेंआरक्षण की बात अर्थात वर्गीकरण की बात कह रहे हैं।चिराग पासवान एससी केआरक्षण में क्रिमीलेयर का विरोध करते हुए आरक्षण की समीक्षा को असंवैधानिक बता रहे हैं। ऐसा कह कर वे माझी के सवाल से टकराने से बचते हुए दिख रहे हैं।आरक्षण की समीक्षा हर दस साल में होती है,मगर बिना चर्चा के हीआरक्षण कोअगले 10 वर्षों तक बढ़ाने का प्रस्ताव पारित हो जाता है।
जब सवर्णों को आर्थिक आधार परआरक्षण देने का कानून बना,सब चुप रहे अब यह कहा जा रहा है किआरक्षण की समीक्षा नहीं हो सकती।जिस दिन आर्थिकआधार पर आरक्षण दिया गया उस दिनआरक्षण की संविधान की समीक्षा हुई !
बिहार में नौकरियों के लिए पिछड़ी जाति को दो वर्गों में बांटा गया।कर्पूरी फार्मूलाआज भी लागू है।
पंजाब मेंअनुसूचित समाज की 5-6 जातियों को 90 % नौकरियां थीं,पर जब वर्गीकरण हुआ तब वे 45 % पर आ गए,एससी की अन्य जातियां 10 सेआगे बढ़कर 55 % तक पहुंच गई हैं।इस वर्गीकरण से एससी की कुछ जातियों को घाटा हुआ,पर एससी की जिन जातियों शिक्षित नहीं थे,उनको सरकारी नौकरी कैसे मिलेगी। मुसहर,डोम,मेश्तर की चिन्ता क्यों करें।आरक्षण का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा बन गया है,जो इस देश के लिए घातक है।
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