बड़ी आबादी के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं से मरहूम है बुमुआर पंचायत।
रिपोर्ट:विनोद विरोधी
गया, बिहार।
सूबे में स्वास्थ्य विभाग में आमूल परिवर्तन की चाहे जितना ढिंढोरा पीट लिया जाए, किंतु जिले के मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत बुमुआर गांव में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग की कथित उदासीनता के कारण महीनों से बंद है, जबकि यहां आयुष्मान भारत के तहत हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर भी बना है, लेकिन विडंबना है कि स्थानीय चिकित्सा पदाधिकारी तो छोड़ कोई छोटा स्वास्थ्यकर्मी एवं एएनएम झांकने तक नहीं आते हैं। परिणामत: आम नागरिकों को निजी क्लिनिकों अथवा अन्य स्थानों पर इलाज हेतु जाना पड़ता है। जहां उन्हें आर्थिक दोहन का भी शिकार होना पड़ता है। गौरतलब है कि पंचायत मुख्यालय में स्थित बुमुआर पंचायत एक बड़ी आबादी की भूमिका निभाता है। लेकिन समस्या यह है कि पंचायतवासी राज्य सरकार द्वारा मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से पूरी तरह मरहूम है ।उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत यह है कि कोई देखभाल के अभाव में भी भवन का खिड़की दरवाजा क्षतिग्रस्त हालत में है।
इधर ग्राम स्वराज अभियान से जुड़े लोगों ने इस जनसमस्या को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। अभियान से जुड़े अध्यक्ष विपिन कुमार, उपाध्यक्ष लालमणि दास, सचिव शंभू कुमार समेत अन्य लोगों ने बताया कि यह केंद्र महीनों से बंद रहता है। यहां न तो कोई निचले स्तर के स्वास्थ्यकर्मी आते हैं और ना हीं कोई चिकित्सा पदाधिकारी। केंद्र के बंद रहने से ग्रामीणों को इलाज हेतु बाराचट्टी अथवा मोहनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित अन्य निजी अस्पतालों में शरण लेना पड़ता है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस स्वास्थ्य केंद्र को अविलंब चालू किया जाए तथा आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों, दवाओं व चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस बाबत जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहनपुर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संतोष कुमार से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि सीएचओ का विगत 6 माह से ट्रांसफर हो गया है।वहीं एएनएम स्मृति कुमारी सप्ताह में 3 दिन फील्ड में रहती हैं और एक दिन साप्ताहिक ट्रेनिंग में समय देती है। इधर पितृपक्ष मेला को लेकर भी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है जिस कारण स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद हो सकता है। वैसे यह केंद्र नियमित संचालित हो रहा है।
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