कोडीन कफ सिरप मामले में अधिवक्ता गौरव त्रिपाठी की पैरवी रंग लाई, हाईकोर्ट से जमानत।

450 बोतलें बरामद होने के मामले में आरोपी को राहत, बचाव पक्ष ने कहा—न तो उसके पास से नशीला पदार्थ मिला, न ही उसकी निशानदेही पर बरामदगी हुई
फुरकान कुरैशी 
लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री से जुड़े मामले में प्रीतम सिंह उर्फ मोंटी सरदार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से जमानत मिल गई है। अधिवक्ता गौरव त्रिपाठी ने आरोपी की ओर से पैरवी करते हुए अदालत में अपना पक्ष रखा। पांच अक्टूबर को न्यायमूर्ति राजीव भारती की अदालत ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली। मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपी दीपक मनवानी के पास से कोडीन युक्त कफ सिरप की 450 बोतलें बरामद की थीं। जांच के दौरान प्रीतम सिंह का नाम सामने आया। उसकी ओर से अधिवक्ता गौरव त्रिपाठी ने अदालत में दलील दी कि प्रीतम सिंह का नाम प्राथमिकी में नहीं था और उसे सह-आरोपी के बयान के आधार पर मामले से जोड़ा गया। आरोपी के पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ और न ही उसकी निशानदेही पर कोई बरामदगी हुई। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि केवल फोन पर संपर्क और पैसों के लेनदेन के आधार पर आरोपी की भूमिका तय नहीं की जा सकती। उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है और वह दिसंबर 2025 से जेल में बंद है। वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए फोन रिकॉर्ड, पैसों के लेनदेन और दूसरे आरोपियों से संबंधों का हवाला दिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को बरामद नशीले पदार्थ से जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र पुष्टिकारक साक्ष्य प्रथम दृष्टया सामने नहीं आया। अदालत ने मामले के तथ्यों, जेल में बिताई अवधि और अन्य परिस्थितियों पर विचार करते हुए जमानत मंजूर कर दी। अदालत ने आरोपी को गवाहों को प्रभावित नहीं करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहने समेत अन्य शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया है। जमानत मिलने से मुकदमे की सुनवाई समाप्त नहीं हुई है।

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