चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून के विरोध में ओवैसी साहब ने संसद में आवाज उठाई - नदीम कुरैशी
लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव नदीम कुरैशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मौजूदा राजनीति पर सवाल उठाए हैं।
नदीम कुरैशी ने कहा कि दिसंबर 2023 में जब सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून संसद में लाया गया था, तब बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब ने लोकसभा में स्पष्ट रूप से इसका विरोध किया था। ओवैसी साहब ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए सीजेआई को चयन समिति में शामिल करने की मांग की थी। संसद के रिकॉर्ड में भी ओवैसी साहब का इस विधेयक को लेकर विरोध दर्ज है।
उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता चुनाव आयोग और सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब यह कानून संसद के अंदर बनाया जा रहा था, तब इन दलों के सांसदों ने क्या भूमिका निभाई? उस समय ओवैसी साहब की आवाज के साथ मजबूती से खड़े क्यों नहीं हुए?
नदीम कुरैशी ने कहा कि यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 6 अक्टूबर 2026 को भी असदुद्दीन ओवैसी साहब ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि सीईसी के चयन की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश—तीनों को शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “आज सड़कों पर प्रदर्शन करना आसान है, लेकिन जब कानून संसद में बन रहा था तब संसद के अंदर उस कानून का विरोध करना और सरकार से सवाल पूछना ज्यादा महत्वपूर्ण था। जनता को यह भी जानना चाहिए कि उस समय किस सांसद ने क्या कहा और किसने क्या भूमिका निभाई।”
नदीम कुरैशी ने कहा कि एआईएमआईएम का सवाल किसी प्रदर्शन को रोकने का नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों की भूमिका और उनके संसद में दर्ज रिकॉर्ड को जनता के सामने रखने का है। लोकतंत्र में जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि किसी कानून के बनने के समय किसने उसका विरोध किया और किसने क्या रुख अपनाया।
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